<rss version="2.0" xmlns:media="https://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"> <channel> <generator>Akhbarona Media</generator> <title>أخبارنا : جريدة الكترونية مغربية</title> <link>https://www.akhbarona.com/</link> <description>أخبارنا : جريدة الكترونية مغربية</description> <lastBuildDate>Mon, 10 Aug 2026 12:47:59 +0200</lastBuildDate> <ttl>15</ttl> <copyright>© 2026 Akhbarona Media</copyright> <image> <title>أخبارنا : جريدة الكترونية مغربية</title> <url>https://www.akhbarona.com/themes/icons/rss.png</url> <link>https://www.akhbarona.com/</link> </image>   <item> <title>العدالة والتنمية: رجل في البرلمان ... ورجل في الشارع </title> <link>https://www.akhbarona.com/mobile/politic/9728.html</link>  <media:content large="image" url="https://www.akhbarona.com/thumbs/article_large/6/e/1318024297.jpg" width="600" height="337" /> <media:img url="https://www.akhbarona.com/files/1318024297.jpg" /> <media:thumbnail url="https://www.akhbarona.com/thumbs/article_large/6/e/1318024297.jpg" />  <category>سياسة</category> <pubDate>Fri, 07 Oct 2011 15:51:42 +0200</pubDate> <description>أخبارنا المغربية

 

مع توالي الخطوات التشريعية الممهدة لتنزيل مقتضيات الدستور من خلال المؤسسات الحكومة والبرلمان، بدأت بعض الأحزاب السياسية في بعث رسائل مرموزة توحي بإمكانية عدم</description> <content:encoded> <![CDATA[<p><img src="https://www.akhbarona.com/files/1318024297.jpg"></p>&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;padding: 0px; margin: 0px;&quot;&gt;&lt;strong style=&quot;padding: 0px; margin: 0px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt; &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;padding: 0px; margin: 0px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&lt;strong style=&quot;padding: 0px; margin: 0px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #800000;&quot;&gt;أخبارنا المغربية&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;padding: 0px; margin: 0px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;padding: 0px; margin: 0px;&quot;&gt;&lt;strong style=&quot;padding: 0px; margin: 0px;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;padding: 0px; margin: 0px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;padding: 0px; margin: 0px;&quot;&gt;&lt;strong style=&quot;padding: 0px; margin: 0px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;span style=&quot;padding: 0px; margin: 0px;&quot;&gt;&lt;strong style=&quot;padding: 0px; margin: 0px;&quot;&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify; padding: 0px; margin: 0px;&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #000000; padding: 0px; margin: 0px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;مع توالي الخطوات التشريعية الممهدة لتنزيل مقتضيات الدستور من خلال المؤسسات الحكومة والبرلمان، بدأت بعض الأحزاب السياسية في بعث رسائل مرموزة توحي بإمكانية عدم المشاركة في الانتخابات التشريعية المقبلة أي الاصطفاف إلى جانب دعاة المقاطعة والنزول إلى الشارع.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;padding: 0px; margin: 0px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;color: #000000; padding: 0px; margin: 0px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify; padding: 0px; margin: 0px;&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;السؤال الذي يطرح نفسه وبقوة هو: هل حزب العدالة والتنمية حزب منسجم له قيادة تقرر له أجهزة تناقش وتحسم في القضايا السياسية الهامة؟، أم أن الأمر يتعلق بتجميع ودمج لتيارات إسلامية تحكمها اختيارات مستثيرة تعود لحركات سياسية بعيدة في توجهاتها عن الممارسة الديمقراطية وتتحين الفرصة المواتية للقفز للواجهة والتمكن من مراكز القرار وتفرض اديولوجية لا تؤمن إلا بالفتاوى والتأويل المخدوم؟ .&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify; padding: 0px; margin: 0px;&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;فإذا كان رئيس الفريق في مجلس النواب لحسن الداودي، قد لمح في أكثر من مناسبة خلال مناقشة مشاريع القوانين المنظمة للانتخابات، إلى أن الشارع ينتظر ما ستقدمه القوانين الجديدة والدستور الجديد&amp;nbsp; ,فان حامي الدين عضو الأمانة العامة عاد في استجاب صحفي إلى التأكيد على أن الموقف العام داخل حزب العدالة والتنمية كان دائما مساندا لحركة عشرين فبراير، وان البيان الصادر عن الأمانة العامة وقتها، لا ينبغي أن يفهم على انه موقف مضاد للحركة&amp;nbsp; تتزامن توضيحا حامي الدين حول موقف البي جي دي من 20 فبراير مع تسريب خبر شروع قيادي الحزب والأمين العام حول دعوة المجلس الوطني للحزب للبث في نقط وحيدة الا وهي (( هل يشارك بي جي دي في الانتخابات التشريعية أم لا)) .&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify; padding: 0px; margin: 0px;&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&amp;nbsp;سؤال يحمل في طياته الجواب، أي خيار المقاطعة، فالمتتبع البسيط لتصريحات قيادي العدالة والتنمية بكل توجهاتهم وعملية الشحن التي صاحبت عملية تزيل الدستور، ومناقشات مشاريع قوانين الانتخابات المقبلة لن تترك اي فرصة للتيار المعتدل داخل الحزب بالتعبير عن موقفه ورفض خيار المقاطعة .&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify; padding: 0px; margin: 0px;&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;هذا التحول في منهجية العدالة والتنمية يكشف بوضوح الحسابات الضيقة التي أصبحت تحكم عمل حزب العدالة والتنمية، ورغبته الجامحة في ابتزاز الدولة للحصول على ريع سياسي مقابل حملته وتصويته لفائدة الدستور الجديد . هذه المواقف المتلبسة للعدالة والتنمية أصبحت عسيرة على التحليل فمن جهة يشارك نواب الحزب في لجنة الداخلية بمجلس النواب في مناقشة مشاريع القوانين المنظمة للانتخابات المقبلة ويقدمون تعديلاتهم ويدافعون عنها في جو من الصراحة والديمقراطية ويقبلون بنتيجة التصويت التي يشاركون فيها ثم يخرجون في اليوم الموالي بتصريحات صحفية تهدد بالمقاطعة والرجوع الى الشارع لان الأغلبية الحكومية لم تقبل تعديلاتهم.&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify; padding: 0px; margin: 0px;&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;فهذا هو قمة العبث السياسي، ذلك الممارسة الديمقراطية في جميع الدول المؤمنة بها تقتضي أن يقبل المتنافسون نتيجة التصويت، سواء كانت في صالحهم أم لا، هذا هو الخيار الذي يجب أن يسير وفقه رفاق بنكيران وليس العودة إلى التهديد بالشارع في محاولة لاستمالة شتات التطرف الإسلامي واليساري الذي لا سبيل للحفاظ وجوده وصيانة إلا بالرفض واللاءات لان ذلك هو الأصل التجاري الذي يضمن له التسويق الإعلامي .&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify; padding: 0px; margin: 0px;&quot; dir=&quot;rtl&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;فالأحزاب الوازنة والراغبة في ترسيخ مسار الإصلاح السياسي والديمقراطي تضع مصلحة الوطن فوق الاعتبارات السياسوية والمصالح الانتخابوية&amp;nbsp; فالمغرب استثناء وتأكيد استمرارية هذا الاستثناء مسؤولية الجميع .&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&lt;strong style=&quot;padding: 0px; margin: 0px;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/strong&gt; &lt;/span&gt;
&lt;p style=&quot;padding: 0px; margin: 0px;&quot;&gt;&lt;span style=&quot;font-size: large;&quot;&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;]]> </content:encoded> <guid isPermaLink="true">https://www.akhbarona.com/permalink/9728.html</guid> </item>   </channel> </rss>